YUVA DIVAS:-राष्ट्रहित में हो युवा शक्ति का सुनियोजन -एसएन पाण्डेय


जशपुर(पत्रवार्ता) डीएवी  मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल बगीचा में स्वामी विवेकानन्द की जयंती को युवा दिवस के रुप में मनाया गया।नगर के वार्ड क्रमांक 9 में युवा जागरण रैली निकाली गई जिसमें विद्यालय के छात्र छात्राओं  के साथ शिक्षक व  अभिभावक शामिल रहे।

युवा जागरण रैली की समाप्ति के बाद स्कुल कैम्पस के अंदर बच्चों के कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुडी बातों पर प्रकाश डाला गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वकील नीलकंठ गुप्ता,सुनील सिन्हा व भारत सिंह मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन कर किया गया।स्वागत उद्बोधन में स्कुल के प्राचार्य एसएन  पांडेय  ने  कि  बताया कि सबल राष्ट्र वही है जहां के युवा समाज की मुख्य धारा में जुड़े हुए हैं। इस  युवा दिवस पर यह संकल्प लेने की आवश्यकता है। हमारे देश के युवाओं के पास विराट ज्ञान तो है ही इसके साथ सांस्कृतिक मूल्यपरक नीतियां भी हैं।जिससे हमारे नैतिक मूल्यों का क्षरण नहीं होगा और हम उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत की शैली को मूर्त रूप  दे पाएंगे।


युवा वक्ता योगेश ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए चार सूत्र दिए जिसमें  स्वस्थ युवा सबल राष्ट्र,शालीन युवा श्रेष्ठ राष्ट्र,स्वावलंबी युवा सम्पन्न राष्ट्र और सेवाभावी युवा सुखी राष्ट्र की परिकल्पना है।उन्होंने राष्ट्रहित में इस दिशा की ओर बढ़ने के लिए युवा शक्ति का आह्वान किया।उन्होंने बताया कि वसंत के आगमन के साथ प्रकृति उत्साह उमंग और उल्लास प्रदर्शित करती है।वृक्षों की नव कलिकाएं,प्रस्फुटित होकर नव पल्लवों एवं पुष्पों से प्रकृति का श्रृंगार करती है।यह जो मानव जीवन है इसकी अवधि भी शिशु बालक किशोर युवा वयस्क प्रौढ़ और वृद्ध अवस्थाओं में विभाजित की गई है और 

यह जो युवावस्था है वह 
जीवन का बसंतकाल है।
इस समय शारीरिक परिवर्तनों 
के साथ विचारों व भावनाओं 
में भी खासा परिवर्तन होता है।

परिवर्तन के ये क्षण भावी जीवन को सुधारने और बिगाड़ने दोनों का काम करते हैं।इस संक्रमण काल मे युवाओं को सही दिशा मार्गदर्शन प्रोत्साहन और प्रेरणा की आवश्यकता होती है ताकि राष्ट्र की युवाशक्ति दिग्भ्रमित न हो।


और आज का युवा पूर्ण रूप से दिग्भ्रमित हो चुका है,आज के युवा में जोश तो है पर होश नहीं,नशा उसका स्वभाव स्टेटस बन गया है,शालीनता और संस्कार तो दूर दूर तक नहीं,माता पिता के ऊपर परावलम्बी अलग बना बैठा है,मोबाईल ने फिर से झुक दिया,न स्वस्थ मन है न स्वस्थ तन है।काम,क्रोध लोभ मोह और अहंकार चरम पर है।ऐसे में युवाओं की दिशा क्या होनी चाहिए।



आपको बताना चाहूंगा युवाओं ने अंगड़ाई ली तो भारत आजाद हुआ...युवाओं ने संघर्ष किया तो आपात शासन को उखाड़ फेंका।युग युगांतर के इतिहास में जब जब युवाओं ने करवट ली है राष्ट्र में बड़ा परिवर्तन हुआ है।युवा क्या नहीं कर सकते और यदि युवा ठान लें तो ऐसा कोई काम नहीं जो युवा नहीं कर सकता।

अधिवक्ता सुनील कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन के माध्यम से छात्र छात्राओं का हौसला बढ़ाया और उन्हें युवा दिवस की शुभकामनाएं  दीं। डीएवी की अभूतपूर्व प्रतिभाओं ने स्वामी विवेकानन्द  के जीवन से जुड़े तत्थ्यों को सबके सामने रखा जिसमें सुष्मिता खुंटे,चंचल यादव,प्रज्ञा पाण्डेय,पूजा गुप्ता,आदर्श कुजूुर,आभा गुप्ता,परी अग्रवाल की प्रस्तुति ने सबको भाव विभोर कर दिया। नवमी कक्षा के सत्यांश ग्रुप के द्वारा नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया जो नशा  मुक्ति,स्वच्छता,रोजगार व शिक्षा पर आधारित रहा।कुमार प्रखर ने विवेकानन्द के जीवनी पर आधारित गीत का गायन कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।जिसमें संगीत शिक्षक नगेंद्र ने ऑर्गन पर साथ दिया। 

पूरे  कार्यक्रम के दौरान स्वामी विवेकानन्द व रामकृष्ण परमहंस के जीवंत वेशभूषा में कृतार्थ वर्मा,अनुष्का कुजूर व पलक भगत ने युवा शक्ति का सन्देश दिया।मंच  का संचालन हिन्दी शिक्षक मुरली चौहान व नवमी कक्षा की छात्रा प्रज्ञा पाण्डेय ने किया।सुश्री तारा कंसारी ने आभार ज्ञापन किया जिसके बाद संस्कृत शिक्षक  रूद्रनारायण पाठक के द्वारा शांतिपाठ कराकर सभा का समापन किया गया।उक्त कार्यक्रम में सभी छात्र छात्राओं व  शिक्षक शिक्षिकाओं का खासा सहयोग रहा। 

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