... विशेष टिप्पणी:- कैलाश गुफा अघोषित पत्थरगढ़ी क्षेत्र....?

विशेष टिप्पणी:- कैलाश गुफा अघोषित पत्थरगढ़ी क्षेत्र....?


जशपुर 21 जनवरी 2019।सुनी हुई नहीं,आंखों देखी बात है। कुछ दिनों पहले ही जशपुर जिले में कथित विकास न होने के कारण असंतोष के फलस्वरुप कई गांव में पत्थरगढ़ी कर अपना वर्चस्व स्थापित करने की पुरजोर कोशिश की गई।जिसमें कुछ ने राजनैतिक स्वार्थ साधा तो कुछ असंतुष्ट कानून की जद में आ गए।

अब कैलाश गुफा में विकास विरोधी लहर से एक बार फिर से उसी प्रकार की स्थिति बनती दिख रही है।हांलाकि अब तक कोई सामने नहीं आया पर अंदर ही अंदर यह आग भयावह होती जा रही है।यहां का मुद्दा कुछ अलग है पर विकास से जुड़ा हुआ ही है।

इस इलाके को अघोषित 
पत्थरगढ़ी क्षेत्र कहना उचित होगा।
जहां न शासन की चल पा रही है 
न प्रशासन की।जी हां महामहिम 
राज्यपाल के अनुबंध को धता 
बताकर लोक निर्माण विभाग 
के सड़क निर्माण पर रोक 
लगा दी गई है।

अब आप समझ सकते हैं जहां लोग विकास के लिए तरसते हैं वहां विकास उनके दरवाजे पर खड़ा है और आश्रम प्रबंधन का कहना है "तुम कल आना"।

कैलाश गुफा पर्यटन व आस्था का केंद्र है इसके साथ ही दर्जनों गांव इसके आसपास बसे हुए हैं जिनके आवागमन का एक मात्र साधन कैलाश गुफा पंहुच मार्ग है।

यहां आजादी के बाद पहली बार 16 करोड़ की लागत से कैलाश गुफा तक पक्की सड़क बन रही है जिसपर आश्रम प्रबंधन द्वारा अलकनंदा के दूषित होने का हवाला देते हुए काम पर रोक लगा दिया गया है।

हांलाकि अलकनंदा को कोई दूषित करना नहीं चाहता और सड़क बनने से कोई नदी कभी दूषित नहीं होती।बावजूद इसके बृहत्तर योजना बनाकर इसे सुरक्षित किया जा सकता है।फिलहाल 6.2 किलोमीटर सड़क के निर्माण में लगी रोक से स्थानीय ग्रामीणों के साथ जाति जनजातीय समाज रुष्ट है।

दरअसल कैलाश गुफा गहिरा गुरु की तपःस्थली है जिसे पवित्र रखना सबकी जवाबदेही है खासकर आश्रम प्रबन्धन और उनके अनुयायियों की तो पूर्ण जवाबदेही होनी ही चाहिए।अब इसमें भी लोगों का स्वार्थ घुस गया है ये अलग बात है।

पूज्य गहिरा गुरु के सूत्र सत्य,शांति,दया,क्षमा धारण करें,चोरी,हत्या,मिथ्या का त्याग करें का परिपालन होता नहीं दिख रहा।इसी सूत्र से उन्होंने सनातन संत समाज की स्थापना की और जनजातीय वर्ग को समाज की मुख्य धारा में जोड़ने का अद्भुत कार्य किया।

उनके उत्तराधिकारी समेत आज आश्रम प्रबंधन और वहाँ स्थित जनजातीय समाज दोनों आमने सामने नजर आ रहे हैं।इसका कारण कथित स्वार्थ भी हो सकता है।सैकड़ों एकड़ रिजर्व फारेस्ट की भूमि ही नहीं बल्कि और भी भूमि संबंधी विवाद को लेकर वहाँ के लोगों में आश्रम प्रबन्धन के साथ मतभेद है।

यहां भी पत्थरगढ़ी जैसे 
हालात बनने में देर नहीं।
यहां इसकी सुगबुगाहट सुनने 
को मिल रही है।दरअसल 
यहां विकास में बाधा के फलस्वरूप 
लोगों में आक्रोश पनप रहा है।
जो आने वाले दिनों में और भी
विकराल रुप धारण कर 
सामने आ सकता है।

यहां के आसपास गांव व जाति, जनजातीय समाज का मानना है कि शासन द्वारा स्वीकृत लोकनिर्माण विभाग की सड़क का निर्माण तत्काल शुरु कराया जाना चाहिए।यदि निर्माण शुरु नहीं होता है तो टकराहट की स्थिति निर्मित हो सकती है।

यदि आश्रम प्रबंधन की और कोई मांग है तो उसपर नई योजना के साथ काम किया जा सकता है।यहां लोगों की जरूरत का ध्यान रखते हुए तत्काल स्वीकृत कार्य शुरु कराया जाना लोकहित में होगा।

हांलाकि राजनैतिक परिदृश्य के बदलते ही बात अब जिला स्तर की नहीं रही बावजूद इसके दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ इस समस्या का समाधान निकालने की आवश्यकता है जिससे क्षेत्र अशांत न हो।

योगेश@पत्रवार्ता

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