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चुनाव विशेष:- कुनकुरी में खिलेगा कमल या बदलेगा इतिहास.? चुनावी विश्लेषण


By योगेश थवाईत

कुनकुरी(पत्रवार्ता) जशपुर जिले की वह सीट जहां जनजातीय समाज उम्मीदवार की जीत हार सुनिश्चित करते आए हैं।हम बात कर रहे हैं कुनकुरी विधानसभा की जहां बीजेपी से भरत साय और कांग्रेस से उत्तमदान मिंज समेत दर्जनों प्रत्याशी निर्दलीय व अन्य पार्टियों से चुनाव मैदान में हैं।

कुनकुरी में योगी आदित्यनाथ के चुनावी दौरे के बाद यहां का सियासी माहौल बदला नजर आ रहा है।बीजेपी कुनकुरी सीट में जीत को लेकर आस्वस्त नजर आ रही है वहीं योगी के इस चुनावी सभा के बाद वोटों का ध्रुवीकरण होने से बीजेपी का पक्ष मजबूत होता नजर आ रहा है।

आपको बता दें कि इस विधानसभा में उंराव समाज के साथ जनजातीय समाज की बहुलता है।उंराव समाज जहां कांग्रेस के परंपरागत वोटर्स माने जाते रहे हैं वहीं कंवर व जनजातीय समुदाय बीजेपी के वोटर्स के रुप मे जाने जाते हैं।

एक ओर बीजेपी के उम्मीदवार बेदाग छवि के रुप में तपकरा व कुनकुरी विधानसभा से पूर्व में विधायक व मंत्री रह चुके हैं वहीं पिछले कार्यकाल में भरत साय छग शासन में लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने के साथ कंवर समाज के अध्यक्ष होने के कारण जनजातीय समाज व अन्य समुदायों का उन्हें समर्थन मिल सकता है।


कांग्रेस प्रत्याशी उत्तमदान मिंज उंराव समुदाय से हैं जिनके साथ मिशन का सपोर्ट बना हुआ है।स्थानीय कुनकुरी नगरीय इलाकों के साथ आसपास अब तक मतदाताओं ने अपना पत्ता नहीं खोला है।उन्हें हवा का इंतजार है जो जीतने वाले प्रत्याशी की ओर जा सकते हैं।

बात करें जीत हार की तो यह स्पष्ट है कि पुराने रंजिश को भुलकर यदि मिशन के वोट कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तभी कांग्रेस को इसका लाभ मिलेगा।फिलहाल जनजातीय समाज की एकजुटता से बीजेपी प्रत्याशी भरत साय मजबूत नजर आ रहे हैं।

2013 कुनकुरी विधानसभा

रोहित साय बीजेपी कुल वोट 76593

अब्राहम तिर्की कांग्रेस कुल वोट मिले 47727

हार जीत का अंतर - 28866

2008 कुनकुरी विधानसभा

भरत साय बीजेपी कुल वोट मिले 57113

यूडी मिंज कांग्रेस कुल वोट मिले 47521

हार जीत का अंतर 9592

2008 की अपेक्षा 2013 के विधानसभा चुनाव में कुनकुरी सीट पर लगभग 20 हजार मतदाताओं की वृद्धि हुई थी जिसके कारण 2008 के 9592 मतों के जीत का अंतर 2013 में 28866 तक जा पंहुचा और अब 2018 के चुनाव में कांग्रेस के लिए इस अंतर को कम करना बेहद मुश्किल है वो भी तब जब कांग्रेस का बड़ा वोट बैंक माने जाने वाला ईसाई समुदाय भी कई भागों में विभक्त नजर आ रहा है।

आपको बता दें कि कुनकुरी में ईसाई मतदाताओं की संख्या लगभग 40 हजार के आसपास है वहीं कंवर मतदाता लगभग 50 हजार हैं इसके अलावा उरांव व अन्य समाज के लगभग 40 हजार मतदाता हैं।ये तीन जातियां ही यहां हार जीत तय करती हैं।इसके अलावा और भी कुछ वोट हैं जो परंपरागत नहीं हैं।

हांलाकि निर्दलीय व अन्य पार्टियों से भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं जो बीजेपी व कांग्रेस के लगभग समान वोटों को प्रभावित कर रहे हैं।ऐसे में कुनकुरी सीट पर बीजेपी अपनी जीत को लेकर जहां आश्वस्त नजर आ रही है वहां कांग्रेस के लिए इस बढ़ते हुए हार के अंतर को सम्हालना बड़ी बात होगी।

By योगेश थवाईत
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