... एंटी इनकंबेंसी:-पत्थलगांव से इस बार आदिवासी मुख्यमंत्री ..?बीजेपी की पत्थलगांव सीट में मामूली फेरबदल से बीजेपी भेद सकती है कांग्रेस का चक्रव्यूह,हो सकता है घमासान।

एंटी इनकंबेंसी:-पत्थलगांव से इस बार आदिवासी मुख्यमंत्री ..?बीजेपी की पत्थलगांव सीट में मामूली फेरबदल से बीजेपी भेद सकती है कांग्रेस का चक्रव्यूह,हो सकता है घमासान।

By योगेश थवाईत के साथ प्रदीप ठाकुर।



पत्थलगांव(पत्रवार्ता) इन दिनों जशपुर जिले की सबसे कमजोर सीट पत्थलगांव पर बीजेपी के लिए खतरे का साया मंडराता नजर आ रहा है।

इस बार यहां के मतदाता अपने नेता रामपुकार सिंह को विधायक नहीं बल्कि मुख्यमंत्री के रुप मे देखना चाहते हैं लिहाजा आदिवासी नेता रामपुकार सिंह पर लोगों का समर्थन स्पष्ट नजर आ रहा है।

गौरतलब है कि रामपुकार सिंह जमीनी आदिवासी नेता हैं जिन्होंने 35 वर्षों तक पत्थलगांव में कांग्रेस का झंडा बुलंद किया।अब ढलती उम्र में भी उसी जज्बे के साथ अगला सियासी दांव खेलने की पूरी तैयारी उन्होंने कर ली है।

पत्थलगांव से अगर आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में लोग रामपुकार को अपनी पहली पसंद मान रहे हैं तो इसमें कोई दो राय नहीं कि वे पत्थलगांव के जननेता हैं।इससे न केवल रामपुकार के समर्थन में वोटों का ध्रुवीकरण हो रहा है बल्कि धीर गंभीर सागर की तरह अंदर ही अंदर कांग्रेस इस सीट पर फिर से मजबूत होती दिख रही है।

इससे पत्थलगांव सीट पर बीजेपी को प्रबल नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।कहीं न कहीं पत्थलगांव से रामपुकार को आदिवासी मुख्यमंत्री के रुप में प्रमोट किए जाने से बीजेपी उम्मीदवार शिवशंकर साय का कद बौना हो रहा है।

खास बात यह कि जशपुर जिले की तीनों विधानसभा सीट में एंटी इन्कम्बेंसी से बचने के लिए बीजेपी आलाकमान ने जशपुर और कुनकुरी के विधायकों को टिकट नहीं दिया जबकि जशपुर विधायक ने 34 हजार की लीड से जीत कर प्रदेश में कीर्तिमान रचा था।वहीं मात्र 3909 वोट (2.53 प्रतिशत) से जीतने वाले शिवशंकर साय को पार्टी ने फिर से पत्थलगांव सीट से टिकट दे दिया।जिससे पत्थलगांव सीट पर खतरे के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं।

स्थानीय मतदाताओं में यह चर्चा आम है कि रामपुकार सिंह के टक्कर में शिवशंकर के स्थान पर पूर्व मंत्री गणेश राम भगत उम्मीदवार होते तो यह सीट पुरे प्रदेश के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता था और बीजेपी को आसानी से जीत हासिल हो सकती है।

रामपुकार सिंह और गणेश राम भगत में जबरदस्त कांटे की टक्कर से इनकार नहीं किया जा सकता।आपको बताना लाजिमी है कि दोनों उम्मीदवारों में
कई समानताएं हैं ।

  • दोनों वरिष्ट आदिवासी नेता हैं रामपुकार 6 बार तो गणेश राम 5 बार विधायक रह चुके हैं।
  • दोनों नेताओं की उम्र 70 पार लगभग समकक्ष है।
  • दोनों ही आदिवासी नेता है और दोनों अपनी पार्टी में आदिवासी मुख्यमंत्री के उम्मीदवार हो सकते हैं।
  • दोनों ही राजनीतिक युद्ध मे मंजे हुए खिलाड़ी हैं।


पत्थलगांव के मतदाताओ में यह आम चर्चा है की यदि पत्थलगांव सीट से मुख्यमंत्री के उम्मीदवार चुनाव मैदान में है तो क्यों न पार्टी विचार धारा से ऊपर उठकर एक बार मुख्यमंत्री बनाने के लिए रामपुकार सिंह को वोट दें।

एक बात उभरकर सामने आ रही है यदि उम्मीदवार बदल कर यदि गणेश राम भगत को टिकट दिया गया तो यह विचार बीजेपी के पक्ष में माहौल बना सकता है और यही विचार वापस उनकी ओर मुड़ सकता है।हालांकि उम्मीदवार की घोषणा की जा चुकी है पर जिले की सबसे कमजोर सीट पर पार्टी आलाकमान इस गम्भीर विषय पर चिंतन कर सकती है।

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