... आस्था :- करवाचौथ व्रत की कथा पतियों के लिए भी जरुरी,जानें इसका रहस्य ,पढ़ें पूरी कथा

आस्था :- करवाचौथ व्रत की कथा पतियों के लिए भी जरुरी,जानें इसका रहस्य ,पढ़ें पूरी कथा

By प्रदीप ठाकुर 



पत्थलगाँव(पत्रवार्ता ) करवा चौथ उत्तर भारत के खास त्यौहारों में से एक है। जो खासतौर से विवाहित महिलाओं के लिए है।ये हिन्दू कैलेण्डर के कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और शाम को चंद्रमा को देखकर ही व्रत खोला जाता है।जब तक इसकी कथा न पढ़ ली जाए यह व्रत अधुरा ही होता है ..क्या है कथा ..?

ये व्रत खासतौर से उत्तर भारत जैसे-पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार में ही किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश और शिव-पार्वतीजी के साथ करवा माता की पूजा खासतौर से की जाती है।वही गायत्री शर्मा,निरूपा गुप्ता,शिल्पा,ममता,लक्ष्मी ने बताया कि

करवा चौथ की कई कथाएं प्रचलित हैं लेकिन ऐसी मान्यता है कि ये परंपरा देवताओं के समय से चली आ रही है। कहा जाता है कि देवताओं और दानवों के युद्ध के दौरान देवों को विजयी बनाने के लिए ब्रह्मा जी ने देवों की पत्नियों को व्रत रखने का सुझााव दिया था। 


जिसे स्वीकार करते हुए इंद्राणी ने इंद्र के लिए आैर अन्य देवताआें की पत्नियों ने अपने पतियों के लिए निराहार, निर्जल व्रत किया। नतीजा ये रहा कि युद्ध में सभी देव विजयी हुए आैर इसके बाद ही सभी देव पत्नियों ने अपना व्रत खोला। उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी थी आैर आकाश में चंद्रमा निकल आया था। 

मान्यता है कि तभी से करवा चौथ का व्रत शुरू हुआ। ये भी कहा जाता है कि शिव जी को प्राप्त करने के लिए देवी पार्वती ने भी इस व्रत को किया था। महाभारत काल में भी इस व्रत का जिक्र है आैर पता चलता है कि गांधारी ने धृतराष्ट्र आैर कुंती ने पाण्डु के लिए इस व्रत को किया था।

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