... सियासी समर:- दिखेगा बूढ़े बाजुओं का दम ..? कौन देगा किसे मात ..? एंटी इनकम्बेंसी से किसको फायदा ..? जंगी मुकाबला की सुगबुगाहट,दावेदार कौन ..?

सियासी समर:- दिखेगा बूढ़े बाजुओं का दम ..? कौन देगा किसे मात ..? एंटी इनकम्बेंसी से किसको फायदा ..? जंगी मुकाबला की सुगबुगाहट,दावेदार कौन ..?


सड़क और जिले की मांग पर क्या होगा मतदाता का रुख..? 

पत्थलगाँव(पत्रवार्ता.कॉम) जब बात हो सियासी सफ़र की तो कांग्रेस के आधार स्तम्भ के रुप में खड़े रामपुकार सिंह की शख्सियत को भला कौन नहीं जानता..वहीँ दूसरी ओर अपनी पूरी जवानी वनवासियों और आदिवासियों को समर्पित करने वाले पूर्व मंत्री गणेश राम भगत भी किसी पहचान के मोहताज नहीं।यहाँ इनका नाम आपको समझ नहीं आ रहा होगा दरअसल दोनों ही राजनैतिक और सामाजिक अनुभव रखने वाले धुरंधर हैं जो आज भी हवाओं के रुख को बदलने का जज्बा रखते हैं

हम बात कर रहे हैं जशपुर के डगमगाए हुए पत्थलगाँव विधानसभा सीट की जहाँ इन दिनों लोग राष्ट्रीय राजमार्ग की बदहाली से जूझ रहे हैं वहीँ लम्बे समय से अपने स्वतंत्र अस्तित्व (जिले) की मांग को लेकर ठगे जा रहे हैं  

जशपुर के तीनों विधानसभा जशपुर,कुनकुरी और पत्थल्गाँव में जो सबसे अधिक हाशिये पर मानी जा रही है तो वह है पत्थल्गाँव विधानसभा सीट जहाँ वर्तमान में बीजेपी के विधायक शिवशंकर साय पैंकरा संसदीय सचिव के पद पर सुशोभित हैं



मुद्दे आपके सामने हैं वहीँ लगातार उठ रहे एंटी इनकम्बेंसी के कारण सत्तापक्ष को खासा नुकसान भी उठाना पड़ सकता है ..अब ये सत्ता विरोधी लहर शहर से तो उठ ही रही है इसका असर गाँव के बूथों में क्या होता है यह तो लहर की मजबूती पर निर्भर करता है हांलाकि शाह की रणनीति के सामने ऐसी लहरें टिक नहीं पाती और ध्वस्त हो जाती है वहीँ विधायक शिवशंकर साय पैंकरा ने भी लगभग 1500 चौपाल के माध्यम से कुछ अच्छा करने का प्रयास किया है

फिलहाल इन लहरों को रोकने के लिए 
चार साल की शिथिलता के बाद बीजेपी 
प्रत्याशी के सबसे पहले दावेदार 
शिवशंकर साय पैंकरा गाँव गाँव 
तक पहुंचकर सरकार की 
उपलब्धियों को गिनाने में लगे हैं
 यह अलग बात है की एनएच के 
मुद्दे पर अब तक उन्होंने कोई ठोस 
कदम नहीं उठाया पर जहाँ बोलने की
 जरुरत महसूस की वहां उन्होंने अपनी बात रखी 


फिलहाल की स्थिति का आंकलन करने पर पता चलता है कि 7 बार पत्थलगाँव विधायक रह चुके रामपुकार सिंह को अब भी लोग पसंद करते हैं बावजूद  इनकी भी राह आसान नहीं है  बड़ा सवाल यह भी है कि जब कांग्रेस के शीर्षस्थ नेता ने यहाँ की सीट पर अपनी दावेदारी ठोंक दी तो कांग्रेस से और 10 दावेदार  क्यूँ .? टिकट न मिलने पर असंतोष की परिणति कांग्रेस के लिए नुकसानदायक सिद्ध हो सकती है




इतना ही नहीं सत्ता का सुख कौन नहीं चाहता कांग्रेस में दावेदारी करने वाली सूची में रामपुकार सिंह की बेहद करीबी या यूँ कहें की मुंहबोली बेटी रत्ना पैंकरा भी विधायक के टिकट के लिए कतार में खड़ीं हैं इसमें उनकी कोई गलती नहीं सब्जबाग दिखाने और आश्वासन देने वाले भी शीर्षस्थ नेता ही हैं तो प्रयास तो करना ही चाहिए

वरिष्ठ कांग्रेसी सतनारायण शर्मा बताते 
हैं की 35 साल तक विधायक की कुर्सी 
सम्हालने वाले रामपुकार सिंह की उम्र यूँ
तो 80 साल से ऊपर है पर उनमे अभी भी 
वहीँ उमंग,जज्बा और जोश है।जिन्होंने 
विष्णु देव साय को  लगातार दो बार 
पत्थलगांव सीट पर शिकस्त दी।आगामी 
चुनाव के लिए मुद्दों की कमी नहीं है 
सबसे पहली कमी उन्होंने बताई 
वर्तमान विधायक की निष्क्रियता 
जो उनके जीत का पहला कारण बनेगी

इस मुद्दे पर विधायक शिवशंकर साय बताते हैं कि जहाँ 35 साल के कांग्रेस के शासन काल में लोगो तक सड़क नहीं पंहुची वहां आज वे जन चौपाल लगा रहे हैं उनकी उपलब्धि यही है कि शासन की योजनओं को लेकर लगभग 80 प्रतिशत लोगों का जुड़ाव रमन सरकार से है और इसी मुद्दे को लेकर उनका संपर्क गाँव गाँव तक है

गौरतलब है की पत्थलगाँव की सीट पर जातिगत समीकरण के साथ प्रत्याशी का चयन प्रमुख है जहाँ कँवर समाज की बहुलता है वहीँ मिशनरी उराँव कांग्रेस के परंपरागत वोटर्स के रूप में जाने जाते हैं इसके बाद नागवंशी और अन्य हिन्दू उराँव,गोंड़ समाज के लोग भी है जिनके वोट विभक्त होते हैं 

अब आप सोच रहे होंगे की खबर की शुरुआत में शिवशंकर कहीं नहीं बात पूर्वमंत्री गणेश राम भगत की तो यह समझ लीजिये की संघ प्रमुख के दौरे और कोर कमेटी की बैठक के बाद पूर्व मंत्री की घरवापसी लगभग तय है और यही रणनीति शाह की भी है कि जातिगत वोट न टूटने पाएं इसके लिए जनजातीय समाज के जमीनी नेता से भला अच्छा माध्यम कौन हो सकता है।इसके साथ ही पार्टी संगठन के साथ और भी लोग जुड़ेंगे जो मिशन 65 के लिए कारगर सिद्ध होगा  

बहरहाल इस सीट पर जातिगत समीकरण से ही जीत सुनिश्चित हो सकती है जिसके लिए दोनों ही पार्टियाँ अपने स्तर पर प्रयास कर रहीं हैं अब देखना दिलचस्प होगा की कौन प्रत्याशी चुना जाता है ..? और बूढ़े बाजुओं के अलावा किसमें कितना दम  है ....?

.By Yogesh Thawait 

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