... "असंतोष की परिणति है पत्थरगड़ी-कांग्रेस जाँच दल", आलाकमान को सौंपे गए जांच रिपोर्ट में क्या है खास ...?

"असंतोष की परिणति है पत्थरगड़ी-कांग्रेस जाँच दल", आलाकमान को सौंपे गए जांच रिपोर्ट में क्या है खास ...?

(मामला पत्थरगढ़ी)
वोटों के ध्रुवीकरण के लिए बीजेपी ने दिया धार्मिक रंग - कांग्रेस

रायपुर(पत्रवार्ता.कॉम) जशपुर जिले में पत्थरगड़ी को लेकर गठित राष्ट्रीय कांग्रेस की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रदेश आलाकमान को सौंप दी है। रिपोर्ट में कहा है कि यह आदिवासी समाज में लंबे समय से व्याप्त असंतोष की परिणति है और इसमें कहीं भी संविधान का उल्लंघन होता हुआ नहीं दिखता। प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी पीएल पुनिया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि पत्थरगड़ी को शुरु में भाजपा के नेताओं ने ही बढ़ावा दिया और बाद में इस विवाद को धार्मिक रंग देने के पीछे वोटों के ध्रुवीकरण की मंशा भाजपा की दिखती है।

जांच कमेटी ने प्रभावित ग्राम के ग्रामवासियों और अधिकारियों से बात की,घटनाओं के वीडियो देखे और पूर्व में जारी प्रेसनोट की प्रति का अवलोकन किया।"समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पत्थरगड़ी के मूल में आदिवासियों के मन में जल, जंगल और जमीन का हक छीने जाने का असंतोष है।सरकार की ओर से संवैधानिक प्रावधानों को लागू न करने और विकास कार्य न होने से आदिवासी पत्थरगड़ी की ओर प्रवृत्त हुए हैं।लोगों ने समिति से कहा कि सरकार की ओर से विकास कार्यों के प्रति लगातार उपेक्षा का आरोप लगाया"और कहा कि सड़क,पुल,पेयजल,बिजली,स्वास्थ्य और शिक्षा की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोग नाराज हैं और वे पत्थरगड़ी के जरिए सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहते थे।


कांग्रेस के जाँच दल ने बताया है कि पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को लागू न करने और पेसा कानून की अनदेखी करने की वजह से आदिवासी समाज में बहुत नाराजगी है।जांच से पता चला कि पत्थरगड़ी की योजना ग्राम सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव रखे जाने के बाद बनी और आमतौर पर कोई इसके विरोध में नहीं था। प्रशासन को पत्थरगड़ी की जानकारी पहले से थी और अगर सरकार चाहती तो इसे समय पूर्व इसे रोका जा सकता था।

"समिति ने कहा है कि ग्रामवासियों का कहना है कि न तो उन्होंने गांव में किसी को आने से रोका और न किसी अधिकारी को बंधक बनाया,जैसा कि प्रचार किया जा रहा है। ग्रामवासियों ने समिति के सदस्यों से यह भी जानना चाहा कि पत्थरगड़ी को क्यों तोड़ा गया,इसमें ग्रामवासियों का क्या दोष था ?"

समिति ने किसी बाहरी तत्व की ओर से ग्रामीणों को भड़काए जाने की खबरों को निराधार बताते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा है, “ग्रामीणों से जांच पड़ताल पर पता चला है कि अलग-अलग जगह पर सर्व आदिवासी समाज या अन्य जनजातीय संगठनों द्वारा आयोजित शिविरों में जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों को बतलाया जाता है, पांम्पलेट आदि के माध्यम से भी जानकारी दी जाती है। कुछ ग्रामीण इस प्रकार के आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं। गांव में भी पारंपरिक आम सभा बुलाकर संवैधानिक प्रावधानों के बारे में चर्चा किया जाता रहा है, अतः किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा बहकाने या भड़काने का प्रमाण नहीं मिलता। जनजाति समाज द्वारा बकायदा ग्रामसभा आयोजित कर पत्थरगड़ी का निर्णय लिया गया है जिसमें गांव के सभी जाति धर्म के लोग शामिल थे।” समिति ने कहा है कि ग्रामवासियों द्वारा आपस में चंदा कर पत्थरगड़ी हेतु आवश्यक राशि की व्यवस्था की गई थी। पत्थरगड़ी की सूचना कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सहित सभी आला-अधिकारियों को दी गई थी एवं उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने हेतु आमंत्रित भी किया गया था।

समिति ने कहा है कि पहले तो भाजपा नेता और अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदकुमार साय पत्थरगड़ी की पूजा में शामिल हुए लेकिन बाद में भाजपा के नेताओं ने कथित सद्भावना यात्रा निकाली जिसके कारण तनाव पैदा हुआ। इस यात्रा में केंद्रीय राज्यमंत्री विष्णुदेव साय, क्षेत्रीय विधायक राजशरण भगत, प्रबल प्रताप सिंह,उपाध्यक्ष,जिला पंचायत जशपुर श्रीमती राय मुनि भगत, स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता शिव यादव,लोकनाथ यादव, मुकेश शर्मा, मूलचंद शर्मा, जगेश्वर उरांव, भूपेंद्र यादव, प्रीतम यादव, अर्जुन नाग, गुलाब शर्मा तथा रीना बरला आदि उपस्थित थे। समिति ने अपनी जांच में पाया कि सद्भावना यात्रा के दौरान भड़काने वाले भाषण दिए गए और धमकियां दी गईं।  इसी यात्रा के दौरान धार्मिक भावनाओं को भड़काने का भी प्रयास शुरु हुआ।

समिति ने गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की प्रति मांगी लेकिन वह नहीं मिल सकी। लेकिन समिति ने गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम और उन पर दर्ज धाराओं की जानकारी प्राप्त कर अपनी रिपोर्ट में उस का जिक्र किया है। समिति ने चेतावनी दी है कि अभी प्रदेश के कई आदिवासी इलाकों में पत्थरगड़ी होने के आसार हैं।

जांच के लिए गई समिति में संयोजक आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत भगत, वरिष्ठ आदिवासी नेता एवं पूर्व मंत्री रामपुकार सिंह,विधायक खेलसाय सिंह,पूर्व मंत्री प्रेमसाय सिंह,विधायक चिंतामणि कंवर, विधायक श्यामलाल कंवर,आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य शिशुपाल शोरी,अंबिकापुर महापौर डॉ.अजय तिर्की, प्रदेश कांग्रेस सचिव शफी अहमद,जिला कांग्रेस अध्यक्ष पवन अग्रवाल,नगर पालिक अध्यक्ष हिरूराम निकुंज, ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद गुप्ता एवं इंका नेता संजय किशोर लकडा शामिल थे। 

(साभार-रियलटाइम)

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