... नक्सल जिला नहीं बावजूद उसके उससे बड़ी समस्या ..? सुलगने लगी जशपुर की शांत फिजा...क्या है साजिश का सच

नक्सल जिला नहीं बावजूद उसके उससे बड़ी समस्या ..? सुलगने लगी जशपुर की शांत फिजा...क्या है साजिश का सच

जशपुर(पत्रवार्ता.कॉम) "हमारा संविधान,हमारा कानून" झारखण्ड समेत अन्य जिलों से बहती हवा अब जिले के बगीचा इलाके में पंहुच चुकी है जी हां जिले के बगीचा जनपद पंचायत के गायलूँगा,कलिया,बुटंगा,बछरांव की आबोहवा अब बदली हुई लग रही है।संवैधानिक नियमों का हवाला देकर स्वतंत्र साम्राज्य की सोच को हवा देने की सुगबुगाहट तेज हो गई है एहतियातन प्रशासन ने कमर कस ली है हर विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।वहीँ वर्ग विशेष द्वारा हर परिस्थिति से निपटने के लिए रणनीति बनाये जाने की खबर है


वरिष्ठ पत्रकार संतोष चौधरी ने मौके पर जाकर मामले को समझा और फेसबुक वाल पर पोस्ट किया है जिससे आप कुछ हद तक मामले को समझ सकते हैं जिसमें उल्लेखित है-

 "हम आदिवासी हैं साहब और हमारी संविधान प्रदत्त रूढ़ि प्रथा से मिले हक के साथ जीना चाहते हैं ।सरकार के लोग हमें ऐसा करने से रोक रहे हैं ।पत्थलगढ़ी बनाने नहीं देना चाहते।" ऐसी बातें जशपुर जिले के तीन गांव के आदिवासी कह रहे हैं।वहीं सरकार के लोग इन आदिवासियों की गतिविधि को असंवैधानिक बता रहे हैं और सर्व आदिवासी समाज के सम्मेलन को लेकर काफी अलर्ट हैं।पुलिस फोर्स भी तैनात हो चुकी है।"

गायलूँगा,कलिया,बुटंगा,इलाके में पहले से मुलभुत सुविधाओं समेत नगण्य विकास को लेकर प्रदेश सरकार समेत जिला प्रशासन के खिलाफ ग्रामीण लामबंद हो चुके हैं।लम्बे समय से पनप रहे असंतोष से अब यहाँ के कुछ ग्रामीण खासे आक्रोशित हो गए हैं इस आक्रोश से कहीं ज्यादा भयावह स्थिति अब निर्मित होती दिख रही है जिससे क्षेत्र में टकराहट की स्थिति निर्मित होने के साथ सामाजिक विषमता को बल मिल रहा है

मामले में नजर बनाये हुए पत्रवार्ता की पड़ताल में पता चला की शनिवार को लगभग 200 ग्रामीण आपसी बैठक कर रणनीति बना चुके है जिसमे उन्हें उच्चस्तरीय सहयोग भी प्राप्त हो रहा है प्रशासन के जोर जुल्म का डटकर सामना करने की सलाह आला नेताओं ने दी है वहीँ नेताओं का कहना है कि आदिवासी समाज के परंपरा व रीतिरिवाज में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप व अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा इसके लिए संविधान के दायरे में रहकर विरोध करेंगे और आदिवासी परंपरा की रक्षा करेंगे

बहरहाल मामला चुनौती भरा है,क्षेत्र की शांत फिजा को अशांत करने वाले लगभग 1 दर्जन लोगों के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारी द्वारा प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्यवाही समेत उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट भी जारी किये जाने की खबर आ रही है।आदिवासी समाज के द्वारा एक कार्यक्रम के आयोजन को लेकर सौ रुपये के स्टाम्प में आला अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को आमंत्रण भेजा गया है जिसमे आगामी 22 अप्रैल को बछरांव में कार्यक्रम आयोजन की बात का उल्लेख है


स्थानीय प्रसाशन समेत पुलिस प्रशासन अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह एलर्ट है जिसके द्वारा विशेष बल,टियर गैस समेत अन्य व्यवस्थाएं कर ली गई हैं 


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